OTT प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर विरोध लगातार गहराता जा रहा है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने फिल्म के नाम को आपत्तिजनक बताते हुए इसे ब्राह्मण समाज के खिलाफ सुनियोजित साजिश करार दिया है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस फिल्म के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग को लेकर याचिका भी दाखिल कर दी गई है।
“घूसखोर पंडित” शब्द ही बेमानी: शंकराचार्य
वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि “घूसखोरी वही कर सकता है जिसके पास कोई पद और अधिकार हो। पंडित के पास ऐसा कोई अधिकार होता ही नहीं, जिससे वह किसी से उपकार के बदले पैसा मांग सके।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि पंडित वही कहलाता है जो पूजा-पाठ, वेद-अध्ययन और धार्मिक कर्मकांड के माध्यम से जीवन यापन करता है। यदि कोई ब्राह्मण किसी सरकारी या निजी नौकरी में है, तो वह पंडित नहीं कहलाता। ऐसे में “घूसखोर पंडित” जैसा शीर्षक न केवल गलत है, बल्कि समाज को गुमराह करने वाला भी है।
समाज को बांटने की कोशिश का आरोप
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि फिल्म का यह नाम जानबूझकर ब्राह्मणों को बदनाम करने, उन्हें चिढ़ाने और हिंदू समाज में विभाजन पैदा करने के उद्देश्य से रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह ब्राह्मण समाज को लगातार निशाना बनाए जाने की एक और कड़ी है।
गौ-रक्षा को लेकर सरकार को दी गई समय-सीमा का भी जिक्र
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस दौरान गौ-रक्षा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गौ माता को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को लेकर 40 दिनों की समय-सीमा दी गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल कागजों में सख्त कानून होने से कुछ नहीं होता, बल्कि उसे जमीन पर लागू होते हुए दिखना चाहिए। उन्होंने निर्यात के लिए भेजे जा रहे मांस के कंटेनरों की स्वतंत्र जांच की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं गौमांस को भैंस का मांस बताकर बाहर तो नहीं भेजा जा रहा।
हाईकोर्ट में याचिका, प्रसारण पर रोक की मांग
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं इंडियन लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष कुमार त्रिपाठी ने केंद्र सरकार से फिल्म के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है।
उन्होंने कहा कि यह फिल्म समाज में वैमनस्य फैलाने वाली है और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फिल्म से जुड़े निर्माता, निर्देशक और कलाकारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।
फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर अब धार्मिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर विरोध सामने आ रहा है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि सरकार और अदालत इस विवाद पर क्या रुख अपनाती हैं और फिल्म के भविष्य को लेकर क्या फैसला होता है।